सिकल सेल एनीमिया (Sickle Cell Anemia)

खून में आयरन की कमी से हीमोग्लोबिन की कमी हो जाती है जिसे हम एनीमिया के नाम से जानते हैं। आयरन हमारे शरीर में लाल रक्त कोशिकाओं या रेड ब्लड सेल्स (red blood cells) का निर्माण करता है। ये कोशिकाएं ही शरीर में हीमोग्लोबिन बनाने का काम करती हैं। इसलिए आयरन की कमी से शरीर में हीमोग्लोबिन की कमी हो जाती है और क्योंकि हीमोग्लोबिन ही फेफड़ों से ऑक्सीजन लेकर रक्त में ऑक्सीजन पहुंचाता है इसलिए हीमोग्लोबिन कम होने से शरीर में ऑक्सीजन की कमी होने लगती है। और शरीर को पर्याप्त ऊर्जा नहीं मिल पाती।लोग एनीमिया कोई को कोई बड़ी बीमारी नहीं मानते और इसे अनदेखा करते जाते हैं। लेकिन असल में इस बीमारी से जान भी जा सकती है। एनीमिया के इलाज से पहले एनीमिया के बारे में पूरी जानकारी होना जरूरी है।

सिकल सेल एनीमिया के लक्षण

जिन किशोरों में सिकल सेल एनीमिया होता है उनमें पीलिया के लक्षण दिख सकते हैं। पीलिया कि स्थिति में लाल रक्त कोशिकाएं ज्यादा मात्रा में नष्ट होती हैं। जिसकी वजह से रोगी की आंखों और त्वचा में पीलापन दिखायी देने लगता है। सिकल सेल एनीमिया से ग्रस्त लोगों में सीने, पेट, बांहों, पैरों और शरीर के अन्य हिस्सों में दर्द की शिकायत होती है। जिन अंगों के क्षेत्र में सिकल सेल के कारण रक्त का संचार बंद हो जाता है वहां दर्द की समस्या शुरु हो जाती है। थकान महसूस होना या संक्रमण से लड़ने में समस्या पेश आना भी सिकल सेल एनीमिया का लक्षण है। इसके अलावा जब लोग सिकल सेल बीमारी से ग्रस्त होते हैं जो सीने में दर्द, बुखार, कफ और सांस लेने में भी समस्या होती है।

  1. परनीसीयस एनीमिया : शरीर में विटामीन बी-12 की कमी से परनीसीयस एनीमिया होने की आशंका प्रबल होती है, इस तरह का एनीमिया उन लोगों में सामान्य तौर पर देखा जाता है जो विटामिन बी-12 पचाने में असमर्थ होते हैं, यह परेशानी ज़्यादातर शुद्ध शाकाहारी व्यक्तियों को और लंबे व़क्त से शराब का सेवन करने वालों को होती है, भारी मात्रा में शराब का सेवन अस्थिमज्जा (बोन मैरो) के लिए हानिकारक होता है, शराब अस्थिमज्जा को ज़हरीला बनाकर रेड-ब्लड सेल्स के निर्माण में बाधा उत्पन्न करती है, जिससे एनीमिया का ख़तरा बढ़ जाता है. ऐसे लोगों को ज़्यादातर माइक्रोटिक एनीमिया होता है, हरी सब्ज़ियों की कमी, फलों की कमी से विटामिन बी-12 की मात्रा शरीर में कम हो जाती है, जिससे हीमोग्लोबिन की कमी हो जाती है!
  2. आयरन की कमी : रेड ब्लड सेल्स का निर्माण करने के लिए अस्थिमज्जा को आयरन की ज़रूरत पड़ती है. यह पौष्टिक आहार के ज़रिए शरीर को मिल पाता है. आयरन की कमी से शरीर में एनीमिया हो जाता है!
  3. रक्तस्राव से होने वाला एनीमिया : माहवारी के दिनों में अत्यधिक स्राव, किसी चोट या घाव से स्राव, गैस्ट्रोइंटेस्टाइनल अल्सर, कोलन कैंसर इत्यादि में धीरे-धीरे ख़ून लगातार रिसने से एनीमिया हो सकता है!
  4. अल्पाहार या कुपोषण : रेड-ब्लड सेल्स के निर्माण के लिए कई प्रकार के विटामिन व मिनरल्स की ज़रूरत होती है, इनकी कमी से रेड- ब्लड सेल्स का निर्माण ज़रूरत के हिसाब से नहीं हो पाता है फिर हीमोग्लोबिन बनने में परेशानियां आती हैं ऐसे में व्यक्ति एनीमिया का शिकार बन सकता है!
  5. गर्भधारण में : कुपोषण महिलाओं में आम समस्या है ऐसे में गर्भधारण करने पर भी इस कुपोषण की समस्या का निवारण न हो, तो एनीमिया की परेशानी हो सकती है, गर्भवती महिला में गर्भ सबसे पहले अपने आप को सुरक्षित करता है ऐसे में वह नाभि के ज़रिए होने वाले ख़ून के संचार से पोषित होता है, ऐसे में महिला के शरीर में ख़ून की कमी हो जाती है और शरीर में पानी की मात्रा बढ़ जाती है जो ख़ून में घुल कर महिला के रक्त-संचार को प्रभावित करता है!

एनीमिया के सामान्य लक्षण (Common Symptoms Of Anemia)

  • शरीर में थकान
  • नाखून पीले पड़ना
  • उठने बैठने और खड़े होने मे चक्कर आना
  • आँखों में पीलापन
  • काम करने का मन न करना
  • लेटकर उठने के बाद आँखों के सामने अँधेरा छाना
  • शरीर में तापमान की कमी
  • त्वचा में पीलापन
  • दिल की असामान्य और तेज़ धड़कन
  • सांस लेने मे तकलीफ
  • सीने मे दर्द
  • तलवों और हथेलियों में ठंडापन
  • लगातार रहने वाला सिर मे दर्द]

एनीमिया की जाँच (Diagnostic Test)

अगर इनमें से एनीमिया का कोई भी लक्षण लगातार कुछ दिनों से दिखाई दे रहा हो तो फ़ौरन किसी अच्छे डॉक्टर को दिखाएँ और हीमोग्लोबिन की जांच करवाएं। इसका तुरंत इलाज करना बहुत जरूरी है।

उपचार

जो लोग सकिल सेल एनीमिया के लक्षणों से ग्रस्त होते हैं उन्हें बिना देर किए डॉक्टर से संपंर्क करना चाहिए। ऐसे स्थिति में डॉक्टर रोगी को लाइफस्टाइल से जुड़ी सलाह दे सकता है जिसमें खूब सारा पानी पीना एक है। इसके अलावा कुछ दवाएं दे सकता है जो इस समस्या को ठीक करने में मददगार हो सकती हैं।

घरेलू नुस्खे

शहद (Honey)

शहद आयरन, कॉपर और मेंगनीज़ का शक्तिशाली स्रोत है। इन सबके सेवन से खून की कमी दूर होती है। इसलिए शहद को एनीमिया के लिये शक्तिशाली इलाज माना जाता है। एनीमिया के इलाज के लिए आप शहद को सेब के टुकड़ों के साथ या फिर केले के साथ ले सकते हैं। एक गिलास पानी में नींबू का रस मिलाएँ और फिर इसमें 1 चम्मच शहद मिलाएँ। इस एक गिलास का हर रोज़ सेवन आपके खून की कमी से दूर रखेगा।

चुकंदर

चुकंदर में आयरन की भरपूर मात्रा होती है, इसे खाने से शरीर में खून की कमी नहीं होती। इसको रोज अपने खाने में सलाद या सब्जी बनाकर प्रयोग करने से शरीर में खून बनता है।

अनार (Pomegranate)

अनार शरीर में हीमोग्लोबिन (Hemoglobin) को बहुत तेजी से बढ़ाता है। अनार में प्रोटीन और कार्बोहाइड्रेट की उच्च मात्रा होती है। इसमें आयरन और कैल्शियम भी होता है। यह खून में हीमोग्लोबिन की मात्रा को तेजी से बढ़ाकर रक्त संचार को ठीक रखता है। एनीमिया के उपचार के लिए सुबह खाली पेट अनार खाएं और रोजाना अनार का जूस पीएं।

फल

एनीमिया से पीडि़त लोगों को यही सलाह दी जाती है कि वह खूब फल और सब्‍जियां खाएं। फल जैसे खजूर, तरबूज, सेब, अंगूर, किशमिश और अनार खाने से तेजी से खून बढता है।

अंजीर खायें

एनीमिया के लिए अंजीर का सेवन बहुत फायदेमंद माना जाता है। अंजीर में विटामिन बी12, कैल्सियम, आयरन, फास्‍फोरस, पोटैशियम जैसे जरूरी तत्‍व पाये जाते हैं जो खून की कमी दूर करते हैं। यह ब्‍लड प्रेशर को नियंत्रित रखने में भी मददगार है।

पालक (Spinach)

पालक में भरपूर लौह तथा विटामिन बी 12 होता है। इसके साथ ही पालक फोलिक एसिड (Folic Acid) का भी उच्च स्त्रोत है। ऐसे में पालक खाने से खून की कमी पूरी होती है। उपचार के लिए पालक का सूप बनाकर, या पालक का साग आदि को अपने रोज के खाने में शामिल करना चाहिए।

योगा करें

बड़ी से बड़ी बीमारी का इलाज योगा के माध्यम से संभव है। योगा सूर्यनमस्‍कार, सर्वांगआसन, शवासन और पश्चिमोत्तानासन करने से पूरे शरीर में खून का फ्लो बढ़ जाता है।

इसके अलावा गहरी सांस भरना और प्रणायाम करना भी लाभदायक होता है।