क्या है मानसिक रोग लक्षण, और इसके इलाज

आजकल स्मृति का कमजोर हो जाना, भय लगना, अवसाद आदि शिकायतें आम होती जा रही है। कहीं न कहीं ये मानसिक बीमारी के लक्षण भी हो सकते हैं। जानकारी के अभाव या सुस्त रवैये के कारण अक्सर लोग मानसिक रोगों को पहचान नहीं पाते, या फिर इन्हें गंभीरता से नहीं लेते। जिस कारण भविष्य में ये गंभीर रूप ले लेते हैं। मानसिक रोगों से बचाव के लिए इनके लक्षणों को समय से पहचाना बेहद जरूरी होता है। चलिए जानते हैं कि मानसिक रगों के लक्षणों को कैसे पहचाना जाए।

  • मानसिक बीमारियाँ आमतौर पर किसी भी व्यक्ति को उसके जीवन के शुरू के वर्षो, खासकर किशोरावस्था व युवावस्था, में अपना शिकार बनाती हैं। हालाँकि इनसे कोई भी प्रभावित हो सकता है, लेकिन युवा और बूढ़े लोग इनसे सबसे अधिक प्रभावित होते हैं।
  • मानसिक रोग के आनुवंशिक कारण भी हो सकते हैं जैसे मंदबुद्धि होना, मिर्गी रोग उन लोगों में ज्यादा मिलते हैं, जिनके परिवार में इसका कोई इतिहास रहा हो, ऐसे लोगो के बच्चो को इनका खतरा सामान्‍य लोगों के मुकाबले लगभग दोगुना हो जाता है।
  • कुछ दवाओं, रासायनिक तत्वों, धातुओं, शराब व अन्य नशीले पदार्थों आदि का सेवन मनोरोगों के होने का कारण बन सकते हैं।
  • साइकोसिस (जैसे स्कीजोफ्रीनिया, उन्माद, अवसाद इत्यादि), व्यक्तित्व रोग, मदिरापान, मंदबुद्धि होना, मिर्गी इत्यादि आदि रोग उन लोगों में ज्यादा मिलते हैं, जिनके परिवार में इसका को कोई इतिहास हो, उनकी संतान को इनका खतरा सामान्‍य लोगों की अपेक्षा लगभग दोगुना हो जाता है।
  • (Addictive Disorders ) लत-संबंधी बीमारियाँ (एडिक्टिव डिसऑर्डर)- ये शराब, सिगरेट या अन्य मादक पदाथों के प्रति अत्यधिक लगाव या लत के कारण पैदा होने वाली समस्याएँ हैं। इस मानसिक रोग में रोगी बैचैन हो जाता है, शरीर कापने लगता है, नींद की कमी और स्वभाव चिडचिडा हो जाता है |

मानसिक रोग का इलाज करवाएँ

मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञ ज़्यादातर मानसिक बीमारियाँ ठीक कर सकते हैं। इसलिए ज़रूरी है कि सबसे पहले आप एक अच्छे और अनुभवी डॉक्टर से जाँच करवाएँ। डॉक्टर उसे उसकी बीमारी के बारे में अच्छी तरह समझा सकते हैं। साथ ही, वह उसे रोज़मर्रा की समस्याओं से निपटने के लिए कुछ व्यावहारिक सलाह दे सकता है और इस बात की अहमियत समझा सकता है कि क्यों इलाज बीच में न छोड़ें। डॉक्टर से सलाह-मशविरा करते वक्‍त अच्छा होगा अगर परिवार का कोई सदस्य या दोस्त साथ में हो, ताकि वह बीमार व्यक्‍ति को सहारा और दिलासा दे सके। जाँच के बाद रोगी को फायदा तभी होगा जब वह सही इलाज करवाए। इसका मतलब, उसे अपनी बीमारी के बारे में दूसरों से बात करने में झिझक महसूस नहीं करनी चाहिए।

इसके अलावा:

  • शरीर को चुस्त रखनेवाले काम कीजिए।
  • भरपूर नींद लीजिए।
  • हर दिन थोड़ा आराम कीजिए।
  • सही मात्रा में पौष्टिक भोजन लीजिए।