चर्म रोग व उपचार

चर्म रोग व उपचार

आज के युवक में चर्म रोग एक विकराल समस्या है। चर्म रोग एक विशेषज्ञों के यहाँ रोगियों की लम्बी कतारे लगी रहती है। चर्म रोग के मुख्य कारणों में सफाई का ध्यान न रखना, विरुद्ध आहार सेवन व रक्तदोष है। चर्म रोग में खुजली, दाद, खाज (एक्जिमा), फुलबहरी, व कोढ़ अदि रोग आते है। इन सबसे खाज प्रमुख है अतः यहाँ इसी का वर्णन करंगे।

कारण –

चर्मरोगोत्पत्ति निम्नलिखित कारणों से होती है –

१. शरीर पर मैल जमने, मैले कुचले वर्स्त्र धारण करने, व कई अनेक दिनों तक स्नान न करने से।

२. विभिन्न रासायनिकों द्रव्यों, विषैली वनस्पतीयों के संपर्क से।

३. मधुमेह के कारण- यह खुजली दिन में कम व रात में अधिक होती है व प्रायः गुप्तांगों में अधिक पाई जाती है।

४. स्त्रियों में स्त्री हार्मोन के कारण कण्डु उत्पन्न होती है।

५. पसीना सुखकर उससे जीवाणु उत्पन्न होना भी खुजली का कारण है।

६. उदर कृमि भी गुदा में कण्डु उत्पन्न करते है यही कृमि गुदा से निकल कर स्त्री मूत्र मार्ग व योनि में प्रवेश कर वहां खुजली पैदा करते है।

७. गर्भ रोधक गोलियां, त्वचा रोगों के संक्रमण व मनोवैज्ञानिक कारणों से भी योनिकुंडु उत्पन्न होती है। अस्वछता भी कारण है।

८. मधुमेह, भगन्दर, अस्वछता, ज़ू, अर्श से गुदाकण्डु उत्पन्न होती है।  क्लोरीन फेनीकुल आदि औषधियों के प्रयोग से आंत के लाभकारी जीवाणुओं की कमी हो जाती है। जिससे आंत में फंगस रोग उतपन्न होकर गुदाकण्डु पैदा करते है।

९. मानसिक कारणों से भी खुजली पैदा होती है।

 रोग से बचाव उपचार

रोग के कारणों को नष्ट करे बिनायह रोग स्थाई रूप से नष्ट नहीं होगी। जैसे मधुमेह, उदारकृमि, ज़ू इत्यादि, यदि मधुमेह व उदरकृमि जैसे रोग है तो कण्डूरोग नाशक चिकित्सा साथ-साथ ही जनि चाहिए। जैसे यदि डायबिटीज़ है तो जामुन की गुठलियों, मेथीदाना या करेले के चूर्ण के साथ कण्डु का इलाज करे। व्यक्तिगत सफाइ रखना चाहिए। कभी-कभी पानी में नीम की पत्तियां उबाल कर नहाना चाहिए। नीम जुंओ व कण्डु के कृमियों को नष्ट करता है। मानसिक शांति बनाये रखें। स्वच्छ वस्त्र धारण करे। चर्म रोगों की चिकित्सा में बहर अतरिक्त दोनों चिकित्सा करना चाहिए जैसे लगाने के लिए नीम का तेल, कंसी का तेल लगाना चाहिए तथा नीम के पत्तियों का रस, सारीनासन, खदिरारिष्ट आदि का सेवन करना चाहिए। योनिकडु में नीम का तेल लगाना अत्युत्तम है। सरे शरीर में खुजली हो तो नारियल के तेल में असली डेला कपूर मिलाकर लगाए। नीम के पत्तों को उबालकर उस जल से स्नान करे। कण्डु हो जाने पर नमक का सेवन बंद या कम कर देना चाहिए। विटामिन-बी का सेवन करना चाहिए। अतः इसकी चिकित्सा विशेषज्ञों से कराये।